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    अमेरिका की सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत:जंग के बीच 30 दिन की छूट, ईरान ने कच्चे तेल के 200 डॉलर तक पहुंचने की चेतावनी दी थी

    10 hours ago

    अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर के पार चली गई हैं। इसे काबू में करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने दूसरे देशों को भी रूस से तेल खरीदने की अस्थाई मंजूरी दे दी है। रूस के कई ऑयल टैंकर समुद्र में फंसे हैं। इससे पहले अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों में ढील देने की बात कही थी। हालांकि, इस पर भारतीय अधिकारी कह चुके हैं कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है। सिर्फ समुद्र में फंसे जहाजों से तेल खरीदने की मंजूरी अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (वित्त मंत्रालय) ने गुरुवार को एक लाइसेंस जारी किया। इसके तहत उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की डिलीवरी और बिक्री की जा सकती है, जो 12 मार्च की रात 12:01 बजे से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे। यह छूट सिर्फ 11 अप्रैल तक के लिए दी गई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि इसका मकसद दुनियाभर में तेल की सप्लाई बढ़ाना है, ताकि बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सके। अमेरिका ने कहा- रूस को ज्यादा फायदा नहीं होगा अमेरिका के ट्रेजरी मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रम्प वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक शॉर्ट-टर्म फैसला है और इससे रूस को कोई बहुत बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा। बेसेंट के मुताबिक रूस की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल निकालने के वक्त लगने वाले टैक्स से आता है, जबकि यह छूट सिर्फ उस तेल के लिए है, जो पहले से ही ट्रांजिट (रास्ते) में है। क्यों बदला अमेरिका का मन? 3 मुख्य वजहें 1. होर्मुज रूट से सप्लाई ठप: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में सप्लाई ठप हो गई है। यहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। भारत जैसे देश अपनी जरूरत का करीब आधा तेल और गैस इसी रास्ते से मंगाते हैं। 2. 200 डॉलर पहुंच सकता है कच्चा तेल: पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर जंग जारी रही तो कीमतें 200 डॉलर तक पहुंच सकती है। ऐसे में रूसी तेल बाजार में आने से सप्लाई बढ़ेगी, जिससे कीमतों में गिरावट आएगी। 2022 में अमेरिका ने लगाई थी रूसी तेल पर रोक रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है। जब फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो पश्चिमी देशों का मानना था कि युद्ध के लिए पैसा रूस को तेल और गैस बेचकर मिल रहा है। इसी 'फंडिंग' को रोकने के लिए अमेरिका और यूरोप ने रूस से तेल खरीदने पर पाबंदी लगानी शुरू की थी। कच्चा तेल 101 डॉलर प्रति बैरल पार मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हाल ही में हुए हमलों के बाद फिर से कच्चे तेल की कीमतों में 9% से ज्यादा की तेजी आई है। इस उछाल के साथ ही तेल का दाम एक बार फिर 101.50 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया है। बाजारों को सामान्य रखने के लिए स्ट्रैटजिक रिजर्व (आपातकालीन भंडार) से रिकॉर्ड मात्रा में तेल निकालने के फैसले पर भी सप्लाई रुकने का डर भारी पड़ गया है। 167 किमी लंबा जलमार्ग है होर्मुज ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… गांवों में 45 दिन बाद मिलेगा दूसरा घरेलू LPG सिलेंडर: जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने 20 दिन समय बढ़ाया; MP में ऑनलाइन बुकिंग ठप अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है, जिसे रोकने के लिए सरकार ने बुकिंग के नियमों में फिर से बदलाव किया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर लेने के बाद अगला सिलेंडर 45 दिन बाद बुक किया जा सकेगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि यह फैसला सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज करने और बेवजह होने वाली 'पैनिक बुकिंग' को रोकने के लिए किया है। पूरी खबर पढ़ें…
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