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    अमेरिका का दावा- चीन ने 2020 में छिपकर न्यूक्लियर-टेस्ट किया:जानबूझकर ताकत बढ़ा रहा, 6 साल में 400 हथियार बनाए; अमेरिका की बराबरी करना चाहता

    13 hours ago

    अमेरिका और चीन के बीच परमाणु हथियारों को लेकर तनाव फिर से बढ़ गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन पर आरोप लगाया है कि उसने लगभग छह साल पहले एक सीक्रेट न्यूक्लियर टेस्ट किया था। अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव क्रिस्टोफर येव ने सोमवार को कहा कि लगभग छह साल पहले, 22 जून 2020 को चीन के पश्चिमी इलाके में स्थित लोप नूर में अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट सेंटर पर एक विस्फोट हुआ था। यह विस्फोट 2.75 तीव्रता का था, जिसकी जानकारी पड़ोसी देश कजाकिस्तान के स्टेशन से मिली। येव ने इसे एक परमाणु विस्फोट बताया। उन्होंने कहा कि भूंकप माइनिंग विस्फोट से अलग थे। यह एक सिंगल फायर एक्सप्लोजन की तरह था, जो परमाणु परीक्षण की निशानी है। येव ने कहा कि चीन ने जानबूझकर अपनी परमाणु ताकत बढ़ाई है। उन्होने बताया कि 2020 से अब तक चीन के परमाणु हथियार 200 से बढ़कर 600 से ज्यादा हो गए हैं। अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 1,000 से ऊपर पहुंच जाएगी और अगले 4-5 सालों में चीन, अमेरिका के बराबर हो सकता है। अमेरिका का दावा- चीन अपने परमाणु जखीरे का विस्तार कर रहा यह दावा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और रूस के बीच का आखिरी बड़ा परमाणु समझौता, न्यू स्टार्ट संधि, इस महीने खत्म हो गया है। इस संधि के खत्म होने के साथ ही दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के हथियारों पर लगी सीमाएं हट गई हैं, जिससे नई न्यूक्लियर हथियारों की दौड़ की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका अब चीन और रूस से पारदर्शिता और खतरनाक हथियारों को सीमित करने की मांग कर रहा है, जबकि चीन इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। येव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण (हथियारों का त्याग) कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि न्यू स्टार्ट समझौते की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसमें चीन के तेजी से बढ़ते और गोपनीय परमाणु कार्यक्रम को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि रूस के पास करीब 2,000 गैर-रणनीतिक (नॉन-स्ट्रैटेजिक) परमाणु हथियार हैं, लेकिन चीन भी बिना किसी रोक-टोक के अपने परमाणु जखीरे का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिका, रूस और चीन के बीच तीन तरफा समझौता चाहते हैं ट्रम्प पिछले कुछ सालों में परमाणु हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई विवाद हुए हैं। 2010 में अमेरिका और रूस ने न्यू स्टार्ट संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जो दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करती थी। इस संधि के तहत दोनों देशों को अपने परमाणु वारहेड्स को 1,550 तक सीमित रखना था और मिसाइलों और बॉम्बर्स की संख्या पर भी पाबंदी थी। इस संधि में रूस के गैर-रणनीतिक परमाणु हथियारों, जैसे छोटी दूरी के हथियारों को शामिल नहीं किया गया था। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका, रूस और चीन के बीच तीन तरफा परमाणु समझौते की कोशिश की थी, लेकिन यह असफल रही। ट्रम्प ने 2020 में अमेरिका के परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने की बात भी कही थी, हालांकि बाद में स्पष्ट किया गया कि इसमें विस्फोटक परीक्षण नहीं होंगे। 1992 के बाद अमेरिका ने कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया है। चीन का आरोप- अमेरिका खुद परीक्षण शुरू करना चाहता चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सम्मेलन में चीन के राजदूत जियान शेन ने कहा कि अमेरिका के दावे पूरी तरह झूठे हैं। यह अमेरिका का बहाना है ताकि वह खुद परीक्षण शुरू कर सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन ने हमेशा परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) का पालन किया है और पांच परमाणु शक्तियों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) की प्रतिबद्धता के मुताबिक कोई परीक्षण नहीं किया। चीन का कहना है कि उसका परमाणु भंडार अमेरिका या रूस जितना बड़ा नहीं है, इसलिए तीन तरफा वार्ता की मांग गलत है। उन्होंने बताया कि चीन की रणनीतिक स्थिति अलग है और वह केवल रक्षा के लिए परमाणु हथियार रखता है। वॉशिंगटन में कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के विशेषज्ञ टोंग झाओ ने कहा कि अगर चीन ने सच में परीक्षण किया तो उसकी जिम्मेदार परमाणु शक्ति वाली छवि खराब हो सकती है और अमेरिका को परीक्षण बहाल करने का मौका मिल सकता है। दूसरे देशों पर दबाव बना रहे ट्रम्प अमेरिका अब इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा रहा है। येव ने सम्मेलन में दूसरे देशों चीन और रूस पर बहुपक्षीय बातचीत में शामिल होने के लिए दबाव डालने के लिए कहा है। अमेरिका ने रूस और चीन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है और फ्रांस, ब्रिटेन जैसे सहयोगियों के साथ चर्चा जारी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कम परमाणु हथियार चाहता है, लेकिन चीन और रूस की वृद्धि को देखते हुए चुप नहीं बैठेगा। यह पूरा मामला वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। अगर परमाणु परीक्षण फिर शुरू हुए तो हथियार दौड़ और तेज हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता और बातचीत से ही इस समस्या का समाधान निकल सकता है। परमाणु हथियारों की टेस्टिंग का आदेश दे चुके ट्रम्प ट्रम्प खुद भी साल 2025 के अंत में रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) को परमाणु हथियारों की तुरंत टेस्टिंग शुरू करने का आदेश दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह टेस्टिंग चीन और रूस के बराबर होनी चाहिए। अमेरिका ने आखिरी बार 23 सितंबर 1992 को परमाणु परीक्षण किया था। यह अमेरिका की 1,030वीं टेस्टिंग थी। टेस्टिंग रेनियर मेसा पहाड़ी के 2300 फीट नीचे नेवादा टेस्ट साइट पर की गई, ताकि रेडिएशन बाहर न फैले। इसका कोडनेम था- डिवाइडर। विस्फोट जमीन के नीचे इतनी जोर से हुआ कि नीचे की चट्टानें पिघल गई थीं। जमीन की सतह लगभग 1 फुट ऊपर उठकर फिर धंस गई। वहां अभी भी 150 मीटर चौड़ा और 10 मीटर गहरा गड्ढ़ा दिखाई देता है। चीन हर साल 100 नए परमाणु हथियार बना रहा दुनिया के 9 परमाणु हथियार संपन्न देश अपनी न्यूक्लियर ताकत लगातार बढ़ा रहे हैं। सबसे तेज रफ्तार से यह काम चीन कर रहा है, जिसने हर साल औसतन 100 नए वॉरहेड अपने जखीरे में जोड़े हैं। अब उसके पास कम से कम 600 परमाणु वॉरहेड हो चुके हैं। ये जानकारी स्वीडन स्थित थिंक टैंक SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की ताजा रिपोर्ट में दी गई है। SIPRI की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के अलावा अमेरिका, रूस, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल जैसे देश भी अपने न्यूक्लियर हथियारों को आधुनिक बना रहे हैं। भारत के पास फिलहाल 180 परमाणु वॉरहेड हैं। 2023 में यह संख्या 172 थी। यानी भारत ने भी अपनी क्षमता में मामूली इजाफा किया है। SIPRI का मानना है कि भारत अब कैनिस्टराइज्ड मिसाइल टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है। इससे मिसाइलें युद्ध की स्थिति से पहले भी तैनात की जा सकती हैं। रूस ने दुनिया की पहली न्यूक्लियर पावर्ड क्रूज मिसाइल का टेस्ट किया था रूस ने अक्टूबर 2025 में दुनिया की पहली न्यूक्लियर पावर्ड यानी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली क्रूज मिसाइल बुरेवस्तनिक-9M739 का सफल परीक्षण किया। दावा किया जा रहा है कि यह मिसाइल अनलिमिटेड रेंज वाली है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बताया था कि इसके सभी टेस्ट पूरे हो चुके हैं। ऐसी मिसाइल दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है। पहले कई एक्सपर्ट यकीन नहीं करते थे कि ऐसा हथियार भी बन सकता है, लेकिन यह हकीकत बन चुका है। कोई भी डिफेंस सिस्टम इस नहीं रोक सकता। रूसी सेना के प्रमुख वैलेरी गेरेसिमोव ने बताया कि टेस्ट में बुरेवस्तनिक ने करीब 15 घंटे तक उड़ान भरी। इस दौरान मिसाइल ने 14 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। परमाणु हथियारों की टेस्टिंग से अमेरिका में 6.9 लाख मौतें कुछ अमेरिकी सांसदों का मानना है कि अगर अमेरिका फिर से न्यूक्लियर टेस्टिंग नहीं करेगा तो उसका परमाणु हथियार भंडार कमजोर पड़ सकता है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि बिना धमाका किए भी आधुनिक तकनीक से हथियारों की स्थिति जांची और उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है। 2017 में यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के अर्थशास्त्री कीथ मेयर्स की एक रिसर्च के मुताबिक अमेरिका में इन परमाणु परीक्षणों से निकले रेडिएशन की वजह से लगभग 6.9 लाख अमेरिकी नागरिकों की मौतें हुईं या उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा। 21वीं सदी में अब तक केवल उत्तर कोरिया ने न्यूक्लियर टेस्टिंग किए हैं। अमेरिका और दक्षिण कोरिया लगातार किम जोंग उन पर दबाव बनाते रहे हैं कि वह परमाणु हथियार छोड़ दे और शांतिपूर्ण समझौते की दिशा में बढ़े। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… आज से ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद: समझौते से पीछे हटने वाले देशों को ट्रम्प की धमकी, कहा- गेम मत खेलो, ऊंचे टैरिफ लगाऊंगा अमेरिकी सरकार आज से राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद कर देगी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को टैरिफ समझौते से पीछे हटने वाले देशों को चेतावनी दी है। पूरी खबर पढ़ें…
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