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बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस 7 में जानिए मोनिका बेदी केस की कहानी। मोनिका को साल 2002 में फर्जी पासपोर्ट से दुनियाभर के कई देशों में घूमने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। सीबीआई इन्वेस्टिगेशन हुई और एक्ट्रेस को दोषी पाया गया। मोनिका ने अबू सलेम से शादी की थी। एक एक्ट्रेस का अंडरवर्ल्ड डॉन से रिश्ता कैसे बना, वो जुर्म की दुनिया में कैसे पहुंचीं और क्यों उनकी सजा माफ की गई, जानिए मोनिका बेदी केस में। तारीख- 18 सितंबर 2002 जगह- लिस्बन पुर्तगाल भारत के समयानुसार करीब 8 बज रहे थे। लिस्बन की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक टेजो नदी का किनारा आमतौर पर सेलानियों से भरा होता था, नजारे किसी रोमांटिक फिल्म की तरह होते थे, लेकिन उस शाम ये नजारे थे एक क्राइम थ्रिलर फिल्म के। नदी किनारे एक लग्जरी एसयूवी कार आम गति में चल रही थी कि अचानक ही उस कार के पीछे पुर्तगाल पुलिस की गाड़ियों का काफिला चलने लगा। कार सवार शख्स को एहसास हुआ कि पुलिस उसका पीछा कर रही है, तभी उसने एक्सेलेटर पर पैर मारा और रफ्तार बढ़ा दी। वो किनारा उस रोज पुलिस सायरन से गूंज उठा और चेजिंग कई किलोमीटर तक जारी रही। कुछ किलोमीटर आगे बढ़कर वो लग्जरी एसयूवी कार एक कर्ब (फुटपाथ की बाउंड्री) से जा टकराई। कार अनियंत्रित होकर डगमगा गई और रुक गई। तभी पुर्तगाल पुलिस की टीम पूरा कवर देते हुए कार तक पहुंची और ड्राइवर के हाथ में हथकड़ियां लगा दी। उस रोज पुर्तगाल में गिरफ्तार हुआ वो शख्स भारतीय था। डॉक्यूमेंट्स देखे गए तो हर जगह सिर्फ एक ही नाम लिखा था, अर्सलान मोहसिन अली और पता भी एक ही था। सारे डॉक्यूमेंट्स फर्जी थे। उस शख्स का असली नाम था अबू सलेम, अबू सलेम अब्दुल कय्युम अंसारी, एक कुख्यात गैंगस्टर, टेररिस्ट और मोस्ट वॉन्टेड। तब वो भारत के 20 मोस्ट वॉन्टेड अपराधियों में से एक। जिस पर कई हत्याओं, 1993 सीरियल बम ब्लास्ट, फिरौती, किडनैपिंग जैसे कई केस थे। वही अबू सलेम जिसने भारत के म्यूजिक कंपोजर गुलशन कुमार की हत्या करवाई और राजेश खन्ना पर गोलियां चलवाई थीं। गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुर्तगाल पुलिस अबू सलेम के लोकल पते पर पहुंचीं। वो पिछले कई महीनों से लिस्बन के 284, रुआ दा पाल्मा अपार्टमेंट, मार्टिन मोनिज में रह रहा था। पुलिस पूरे फोर्स और कवर के साथ खामोशी से धीमे कदमों के साथ उस अपार्टमेंट में दाखिल हुई। तभी उन्होंने डिजाइनर कपड़े पहने एक महिला को सीढ़ियों से उतरते देखा। उस महिला की हंसी पूरे अपार्टमेंट में गूंज रही थी। साथ में एक लड़का भी कदम से कदम मिलाकर उतर रहा था और उसके सुनाए गए चुटकुले पर महिला बार-बार टहाके लगाकर हंस रही थी। तभी पुलिस ने एक्शन लिया और उस महिला पर बंदूक तानते हुए हाथ ऊपर करने को कहा। हंसी अचानक थम गई। वो कुछ समझ पाती, उससे पहले उसके हथकड़ियां पहना दी गईं। उसे धकेलते हुए पुलिस वैन में बैठाया गया, साथ मौजूद लड़के की भी गिरफ्तारी हुई और दूसरी तरफ एक पुलिस टीम ने अपार्टमेंट की तलाशी लेना शुरू किया। तलाशी में उस महिला के भी डॉक्यूमेंट्स मिल गए। उनमें नाम लिखा था, सना मलिक कमाल। ये पूरा फिल्मी सीन जिस महिला के साथ घटा था, वो असल में एक हीरोइन थीं। नाम था मोनिका बेदी। अबू सलेम और मोनिका बेदी की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही भारत तक पहुंचीं, तो हर तरफ सनसनी मच गई। आखिर एक बड़ी बॉलीवुड एक्ट्रेस का एक अंडरवर्ल्ड डॉन से क्या ताल्लुक हो सकता है, जिससे उनकी साथ गिरफ्तारी हुई। दोनों को फर्जी डॉक्यूमेंट्स और पासपोर्ट बनवाने, फर्जी पासपोर्ट से पुर्तगाल में आने और कई अन्य देशों में जाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अबू सलेम पर कई गंभीर आरोप थे। 1993 के सीरियल बम ब्लास्ट में नाम आने के बाद से ही इंडियन पुलिस उसकी तलाश में थीं। जांच में सामने आ चुका था कि अबू सलेम का एक बॉलीवुड एक्ट्रेस से रिश्ता है। हालांकि शुरुआत में एक्ट्रेस का नाम सामने नहीं आया था। जब तक पुलिस समझ पाती कि वो एक्ट्रेस मोनिका बेदी हैं, तब तक वो देश छोड़ चुकी थीं। ऐसे में पुलिस उन तक नहीं पहुंच पाईं। अगर मोनिका भारत में ही रह रही होतीं, तो उनकी गिरफ्तारी पहले ही हो जाती। भारत के डॉन के पीछे थी 3 मुल्कों की पुलिस, दो देशों की पुलिस को दिया चकमा पुर्तगाल स्थित अबू सलेम और मोनिका बेदी के घर से मिले डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, अबू सलेम कई अलग-अलग पहचानों से देश बदल रहा था। अर्सलान अली के अलावा वो रमील कमाल मलिक, दानिश बेग, अखिल अहमद आजमी और रमेश कुमार नाम भी रख चुका था। दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन को भी थी अबू सलेम की तलाश सीनियर जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल के अनुसार, गुलशन कुमार की हत्या करवाने पर दाऊद इब्राहिम, अबू सलेम से नाराज हो गए। अबू सलेम उत्तरप्रदेश का रहनेवाला था। वो 80 के दशक में मुंबई आया और अंधेरी रेल्वे स्टेशन के पास एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक शॉप में काम करने लगा। कुछ समय बाद वो दाऊद इब्राहिम के गैंग लीडर सय्यैद टोपी से जुड़ा और फिर उनके लिए हथियार और हवाला के पैसे सप्लाई करने का काम करने लगे। एक्टर संजय दत्त को भी अबू सलेम ने ही हथियार सप्लाई किए थे। सीरियल बम ब्लास्ट में नाम आने पर वो देश छोड़कर भाग निकला और दुबई से काम करने लगा। 90 के दशक के मिड में दाऊद इब्राहिम गैंग को छोटा राजन की गैंग ने जबरदस्त टक्कर दी। छोटा राजन, दाऊद गैंग के लोगों को मरवाने लगा और पुलिस ने भी कई एनकाउंटर किए। इस समय अबू सलेम ने कई स्ट्रेटजी दीं, जिससे वो दाऊद का खान आदमी बना। दाऊद ने अबू सलेम को फिल्म इंडस्ट्री से वसूली की पूरी जिम्मेदारी दी। लेकिन जब अबू सलेम ने 12 अगस्त 1997 में प्रोड्यूसर गुलशन कुमार की बिना बताए हत्या करवा दी, तो दाऊद इससे काफी नाराज हुआ। इसी समय अबू सलेम ने डायरेक्टर राकेश रोशन और राजीव राय पर भी हमले करवाए। डायरेक्टर मुकेश दुग्गल की भी हत्या करवा दी गई। यही वजह रही की डी-कंपनी अबू सलेम के खिलाफ हो गई। अबू सलेम भी अंडरग्राउंड हो गया। लेकिन डी-कंपनी उसकी तलाश में थी। केस कवर करने वाले सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल कहते हैं, ‘जिस दिन गुलशन कुमार की हत्या हुई, उस दिन अबू सलेम को 12 करोड़ रुपए फिल्म इंडस्ट्री से मिले। जो लोग पैसे देने में आनाकानी कर रहे थे, गुलशन कुमार की हत्या के बाद उन लोगों ने खौफ में पैसे दिए।’ वो आगे कहते हैं, ‘छोटा राजन भी अबू सलेम को मारने के लिए ढूंढ रहा था और डी-कंपनी भी उसकी तलाश में थी। उस समय मुंबई पुलिस अंडरवर्ल्ड के कुछ लोगों के फोन रिकॉर्ड कर रही थी। टेपिंग में वो लोग बार-बार कह रहे थे ‘चिकना यहां हैं’, ‘चिकना वहां है, उसे पकड़ना है’ ये सारी चीजें रिकॉर्डिंग में थीं। एक क्राइम रिपोर्टर होने के नाते ये इन्फॉर्मेशन मेरे पास आ रही थी। उस समय पुलिस वाले भी यही मान रहे थे और मैं भी यही मान रहा था कि ये लोग फिल्म इंडस्ट्री के चिकना को टारगेट कर रहे हैं, जो ऋतिक रोशन हैं।’ ‘अंडरवर्ल्ड के लोगों ने फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का कोडनेम रखा था। ऋतिक का नाम चिकना था। तब इन्वेस्टिगेटर भी परेशान थे और मैं भी क्योंकि ऋतिक मुंबई में शूट कर रहे होते थे और रिकॉर्डिंग में आता था कि चिकना डेनमार्क में है। तब जाकर सामने आया कि चिकना, अबू सलेम का कोडवर्ड था। दाऊद गैंग ने उसे ये नाम दिया, जिससे किसी को पता न चले कि वो किसे मारना चाहते हैं। अबू सलेम इन लोगों से जान बचाने के लिए मोनिका बेदी के साथ दुनियाभर में भटक रहा था।’ भारतीय पुलिस पहले ही उसकी तलाश में अबू सलेम को वॉन्टेड घोषित कर चुकी थी। इसके अलावा पुर्तगाल पुलिस और अमेरिकन FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) भी अबू सलेम की एक्टिविटी पर नजरें गड़ाए हुए थे। दरअसल, अबू सलेम का पुर्तगाल आने से पहले लंदन, दुबई, सिंगापुर, काठमांडू, अटलांटिक सिटी, न्यूयॉर्क, शिकागो और ज्यूरिख जैसे कई देशों में लगातारा आना जाना था, जिससे वो कई जांच एजेंसियों की नजरों में आ चुका था। 1997 में उसकी यूएई से गिरफ्तारी हुई थी, तब वो अखिल अहमद आजमी नाम के डॉक्यूमेंट्स से उस देश में आया था। हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया था। कुछ समय बाद उसे अबू धाबी से हामिद अतीक नाम से फर्जी डॉक्यूमेंट्स रखने पर गिरफ्तार किया गया, लेकिन तब वो केन्या भाग निकला। अमेरिका के FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) उसकी तलाश में थी और इसके लिए लगातारर सीबीआई से संपर्क में थी। उसे इंटरनेशनल फ्यूजिटिव ट्रैकिंग सिस्टम में डाल दिया था। सलेम के ई-मेल इंटरसेप्ट करने के अलावा FBI के एजेंट को उसके एक्ट्रेस मोनिका बेदी के साथ होने के सबूत मिले थे, जिसके बाद मोनिका को भी ट्रैक किया जा रहा था। ट्रैकिंग की मदद से सामने आया कि अबू सलेम कुछ महीनों से पुर्तगाल में मोनिका बेदी के साथ रह रहा है। इन्फॉर्मेशन मिलते ही पुलिस ने दूसरी जांच एजेंसियों के साथ मिलकर उसके 9 मोबाइल फोन और 3 सैटेलाइन फोन ट्रैक करना शुरू कर दिए। कट्टर दुश्मन छोटा राजन ने FBI को दी थी अबू सलेम-मोनिका की टिप फरवरी 2002 से ही वो जांच एजेंसियों की नजर में था। तभी FBI ने पुर्तगाल पुलिस को उसकी डीटेल्स भेज दी थीं। FBI के लिए उसकी गिरफ्तारी इसलिए भी जरूरी थी क्योंकि उन्हें शक था कि अबू सलेम का अल-कायदा से संबंध हो सकता है। इसकी एक वजह ये भी थी कि अबू सलेम ने अपना फर्जी पासवोर्ट उसी सोर्स से बनवाया, जिससे 9/11 आतंकी हमले के संदिग्धों ने पासपोर्ट बनवाए थे। जांच के दौरान जांच एजेंसी को कई मेल मिले, जिसमें अबू सलेम से जुड़ी इन्फॉर्मेशन दी गई थी। वो मेल कराची से आए थे। बाद में सामने आया कि वो मेल भेजने वाला शख्स कोई और नहीं अबू सलेम का सबसे बड़ा दुश्मन छोटा राजन था। गिरफ्तारी के बाद से ही मोनिका बेदी का नाम अंडरवर्ल्ड की डी-कंपनी से जोड़ा जाने लगा। कुछ सालों से फिल्मी गलियारों में चर्चा थी कि मोनिका का डी-कंपनी से संबंध है, लेकिन ये संबंध क्या और कैसे था, इस बात से हर कोई अंजान था। और फिर सामने आई, मोनिका बेदी और अबू सलेम की लव स्टोरी- जेल में लव लेटर एक्सचेंज करते थे अबू सलेम-मोनिका बेदी 18 सितंबर 2004 को ही पुर्तगाल की जेल में रखा गया। उस समय अंडरवर्ल्ड से जुड़े केस कवर करने वाले मशहूर क्राइम जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल कहते हैं, ‘पुर्तगाल जेल में ऊंची दीवारें, दरवाजे और संतरी तैनात थे, लेकिन इसके बावजूद वार्ड्स के बीच संपर्क पूरी तरह खत्म नहीं होता था। इसी जेल के दौरान मोनिका बेदी और अबू सलेम का रिश्ता और ज्यादा इमोशनल रूप में सामने आया। मोनिका बेदी अबू सलेम को लंबे-लंबे खत लिखा करती थीं। हर खत के अंत में वो खुद को “तुम्हारी गुड़िया” लिखती थीं। इन पत्रों में बेहद भावुक और रोमांटिक बातें होती थीं, प्यार, समर्पण और साथ रहने की कसमें। कई बार वो खतों में स्केच भी बनाती थीं और अपने जज्बातों को तस्वीरों के जरिए जताती थीं। कुल मिलाकर, पुर्तगाल की जेल के दौरान उनका रिश्ता एक तरफ डर, असुरक्षा और अनिश्चित भविष्य से घिरा हुआ था, तो दूसरी तरफ खतों के जरिए जताया गया गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी साफ दिखाई देता था।’ एक खत में मोनिका बेदी ने अबू सलेम को लिखा- मैं जानती हूं तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा होगा, लेकिन जो बात कही वो पूरे यकीन से कही, जब तुम भी सोचोगे तो मानोगे मुझे, यकीन है इसका। मुझे मालूम है बाबू, तुम्हें बचपन से इस्लाम ही सिखाया गया है। और मुस्लिम लोगों के बीच रहे हो या हिंदुओं के। लेकिन हिंदू कुछ नहीं है, न पंजाबी न सिख, मुझे कुछ नहीं मालूम। कुछ दिनों बाद जब मुझे पूरा यकीन हो जाएगा, तो मैं क्रिश्चियन धर्म अपना लूंगी। सॉरी, इस वक्त तुम्हें ये अच्छा नहीं लग रहा होगा, लेकिन जल्द तुम्हें सब कुछ समझ आ जाएगा।खत में आगे मोनिका ने लिखा, मैं ज्यादा नहीं लिखना चाहती, मैं चाहती हूं तुम खुद सीखो और समझो। सच्चाई तुम्हें खुद ही दिख जाएगी, लेकिन प्लीज खुले दिल से समझने की कोशिश करना। बेमन से नहीं।तुम्हें सच लिख रही हूं कि मैं बहुत सी चीजों के लिए तुमसे नाराज थी, लेकिन जब तुम आने पर गले मिले, तो कुछ अजीब सा लगा। कुछ ठीक से बता नहीं सकती। ओ बाबू तुम्हारी कुछ समझ नहीं आ रहा होगा। लेकिन तुम्हें रोता देख खुदा को तुम पर तरस आ गया और तुम उनसे गले मिल लिए। उस दिन तुम अपनी गुड़िया (जैसा अबू सलेम मोनिका को कहते थे) से गले नहीं मिले, खुदा से मिले। जब अबू समय पर जवाब नहीं देते तो मोनिका बेसब्री से इंतजार कर लगातार खत भेजकर सवाल करती थीं। ऐसे ही एक खत में मोनिका बेदी ने लिखा था- ‘माय लव तुम कहां हो। तुम्हारी तरफ से कोई लेटर नहीं आया। क्या तुम अपनी गुड़िया से नाराज हो। मैं जानती हूं कि तुम बेबी से नाराज हो।’ उस समय मशहूर क्राइम जर्नलिस्ट जिग्ना वोरा, इस केस को कवर कर रही थीं। इसके साथ ही वो हुसैन जैदी के साथ मिलकर अबू सलेम पर किताब भी लिख रही थीं, जिसके लिए उन्होंने लंबी रिसर्च की थी। दैनिक भास्कर से बातचीत में जिग्ना वोरा कहती हैं, ‘उस दौरान अबू सलेम को पुर्तगाल से एक्स्ट्राडाइट किया गया था। तो जो उसके कागज थे चार्जशीट, फैक्टुअल पेपर्स, केस से जुड़े डॉक्युमेंट्स उन पर मैंने स्टोरी की। साथ ही मैं अबू सलेम पर एक किताब भी लिख रही थी, जिसका नाम था माय नेम इज अबू सलेम। ये किताब मैं लेखक एस. हुसैन जैदी के साथ को-राइट कर रही थी। लेकिन फिर जब मेरे ऊपर केस हुआ और मैं जेल गई, तो उस वजह से मेरे नाम पर वो किताब नहीं छपी।’ ‘किताब को लिखने के दौरान ही मैंने अबू सलेम पर बहुत रिसर्च की थी, काफी डॉक्युमेंट्स खंगाले थे, जिसमें पुर्तगाल की कोर्ट के पेपर्स भी शामिल थे। तभी मुझे उनके बारे में काफी कुछ जानने को मिला।’ ‘पुर्तगाल जेल में उन्हें अलग-अलग रखा गया था। तो दोनों एक-दूसरे से लव लेटर्स के जरिए कम्युनिकेशन करते थे। एक सेल से दूसरे सेल तक प्यार के खत भिजवाते थे और इस बात का खुलासा मैंने ही किया था। मैंने ही ये स्टोरी सबसे पहले ब्रेक की थी।’ मोनिका बेदी और अबू सलेम के लिए अलग रहना भी मुश्किल था। खतों में साफ था कि दोनों जल्द ही जेल से निकलकर एक अच्छी जिंदगी बिताना चाहते थें, लेकिन फिर जेल में अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिससे मोनिका बेदी ने अबू सलेम से रिश्ता खत्म करने का फैसला कर लिया। उन्होंने अलग होने का इशारा करते हुए एक खत में साल 1968 में आई फिल्म सरस्वतीचंद्र का एक गाना लिखा, बोल थे- छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए प्यार से भी जरूरी कई काम हैं प्यार सब कुछ नहीं जिंदगी के लिए पहले मोनिका बेदी और अबू सलेम को 18 सितंबर 2004 से 10 नवंबर 2005 तक पुर्तगाल में रखा गया, जिसके बाद उन्हें भारत डिपोर्ट किया गया। सजा खत्म होते-होते मोनिका बेदी और अबू सलेम के बीच खतों का सिलसिला खत्म हो चुका था। दोनों को 11 नवंबर 2005 को एक ही चार्टेड प्लेन ने भारत लाया गया। प्लेन में चढ़ते हुए दोनों का पूरे सवा साल बाद आमना-सामना हुआ। जैसे ही अबू सलेम ने मोनिका को देखा, वो भावुक हो गए। उन्होंने बात करना चाहा, लेकिन मोनिका उन्हें बिना देखे नजर झुकाए खड़ी रहीं। वो कौन सी बात थी, जिससे मोनिका ने अबू सलेम को अचानक छोड़ दिया, मोनिका ने क्यों कहा कि गिरफ्तारी से उन्हें सुकून मिला और आखिर एक एक्ट्रेस, अंडरवर्ल्ड डॉन के प्यार में कैसे पड़ी। जानिए सभी सवालों के जवाब मोनिका बेदी केस के पार्ट-2 में। ………………………………. पार्ट-2, नाम बदलकर मोनिका बेदी से अबू सलेम ने बढ़ाईं नजदीकियां: US में नौकरों जैसा सलूक किया, भारत आने से रोका, जेल में भिजवाए फूल 11 नवंबर 2005 को मोनिका बेदी और अबू सलेम को भारत लाया गया। मोनिका बेदी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 419 (छल से प्रतिरूपण) और 420 (धोखाधड़ी) और पासपोर्ट अधिनियम, 1967, सेक्शन 12 के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुर्तगाल में पहले ही सजा काट चुकीं मोनिका बेदी पर भारत में नया केस हुआ। 29 सितंबर 2006 में इंडियन कोर्ट पासपोर्ट एक्ट की धारा के अलावा अन्य धाराओं पर दोषी मानते हुए 5 साल की सजा सुनाई। जिस समय मोनिका बेदी को पुर्तगाल जेल में रखा गया था, तब उन्हें अबू सलेम की चार्जशीट दिखाई गई। चार्जशीट देखने के बाद मोनिका बेदी को एहसास हुआ कि जिस शख्स को वो बड़ा बिजनेसमैन समझती थीं, उस पर कई हत्याओं के आरोप हैं और उसका नाम 1993 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में आ चुका है। अबू सलेम ने पुलिस कस्टडी में दावा किया कि वो और मोनिका बेदी साल 2000 में लॉस एंजिलिस की एक मस्जिद में निकाह कर चुके हैं और मोनिका उनकी कानूनी तौर पर पत्नी हैं। पूरी कहानी पढ़िए कल, मोनिका बेदी केस के पार्ट-2 में। ………………………………………… भास्कर की नई सीरीज बॉलीवुड क्राइम फाइल्स की ये कहानियां भी पढ़िए- पार्ट-1, शाइनी आहूजा रेप केस:मेड बोली- कमरे में बंद किया; सीमन सैंपल हुए मैच, एक्टर बोले- संबंध रजामंदी से बने 14 जून 2009 शाम का समय था। एक लड़की रोती-बिलखती हालत में ओशिवारा पुलिस स्टेशन में दाखिल हुई। उसके साथ कुछ और लोग भी थे। लड़की को पुलिस स्टेशन में बैठाया गया। साथ मौजूद लोगों ने जोर देकर बोला- इसका रेप हुआ है। लड़की लगातार रोए जा रही थी। पुलिस ने पूछा किसने किया, जवाब मिला- शाइनी आहूजा, बॉलीवुड एक्टर। वहां मौजूद हर शख्स हैरान था। मामला हाई प्रोफाइल था, तो पुलिस ने भी बिना देरी किए शिकायत लिखना शुरू किया। आसपास के लोगों ने लड़की का हौसला बढ़ाया और फिर उसने स्टेटमेंट देना शुरू किया, मेरा नाम माधुरी जोशी है, मैं 20 साल की हूं। शाइनी आहूजा के घर में मई से काम कर रही थी। मैं सुबह से शाम वहीं रहती थी। घर में दो मेड और थीं। उस दिन घर में कोई नहीं था। अचानक उन्होंने मुझे पकड़ लिया। मैंने बचने की कोशिश की तो मारा। पूरी कहानी पढ़िए…
…………………………. पार्ट-2, शाइनी आहूजा रेप केस:मेड ने बयान बदला, कहा- रेप नहीं हुआ, 7 साल की सजा हुई; ₹15 लाख की हुई मांग केस चर्चा में था तभी एक अखबार में दावा किया गया कि शाइनी के खिलाफ पुलिस को कई सबूत मिले हैं। दावा था कि शाइनी की पड़ोसी ने उस रोज मेड की चीखों की आवाजें सुनी थीं। इन दावों के बीच शाइनी आहूजा की पत्नी अनुपम आहूजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि उनके पति निर्दोष हैं, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। पूरी कहानी पढ़िए…
……………………………………. पार्ट-1, बालिका वधु एक्ट्रेस प्रत्युषा बोलीं- मैं बिकने नहीं आई:आखिरी कॉल में मां-बाप को गालियां दीं, फिर फंदे पर लटकी मिलीं 1 अप्रैल 2016, दोपहर करीब 12 बजे… प्रत्युषा बनर्जी, बॉयफ्रेंड एक्टर-प्रोड्यूसर राहुल राज के साथ मुंबई के गोरेगांव की हार्मनी बिल्डिंग की सातवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 703 में रहती थीं। दोपहर में राहुल अपने काम से लोखंडवाला गए थे। कुछ देर बाद ही उन्होंने प्रत्युषा को कॉल किया तो वो जोर-जोर से रो रही थीं। थोड़ी कहासुनी होने के बाद प्रत्युषा ने कहा- वोह, राहुल राज, इगो अपने पास रखो, क्योंकि कुछ ही घंटों में, शायद मिनटों में, किसी को इगो दिखाने के लिए नहीं बचेगा। राहुल ने जवाब दिया- देखो, मैं तुमसे बस इतना बोल रहा हूं, खाली सुनो। प्रत्युषा ने बात काटते हुए कहा- मैं तुमसे इतना बोल रही हूं…. मैंने तुमसे बहुत प्यार किया है। पूरी कहानी पढ़िए… पार्ट-2, मौत से पहले प्रत्युषा बनर्जी ने करवाया अबॉर्शन:बॉयफ्रेंड की एक्स ने की थी मारपीट, पोस्टमॉर्टम में शरीर में मिली 100ml शराब प्रत्युषा बनर्जी के दोस्तों ने जिस सलोनी शर्मा पर उनसे मारपीट के आरोप लगाए थे, उन्होंने पुलिस बयान में कबूला कि उन्होंने एक्ट्रेस को थप्पड़ मारा था, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि वो और राहुल राज एक समय में रिलेशनशिप में थे, लेकिन प्रत्युषा की वजह से राहुल ने उन्हें छोड़ दिया। पूरी कहानी पढ़िए ………………………………………………………………………. पार्ट-1, एक्ट्रेस के घर से लापता हुए कास्टिंग डायरेक्टर नीरज ग्रोवर: एक कॉल से पुलिस ने सुलझाई गुत्थी, कातिलों ने लाश के सामने बनाए शारीरिक संबंध मई 2008 की बात है उस दौर की सबसे मशहूर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के पास अमरनाथ ग्रोवर का कॉल आया। उन्होंने घबराती हुई आवाज में कहा, ‘जिग्ना जी, मैं अमरनाथ बोल रहा हूं, मेरा बच्चा गुम हो गया है, क्या आप इस पर स्टोरी करेंगी?’ जिग्ना जो बड़े-बड़े केस की रिपोर्टिंग करती थीं, उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी। उन्होंने जवाब दिया- ‘सर, ऐसे कई बच्चे गुम हो जाते हैं, लेकिन हम सब पर स्टोरी थोड़ी कर सकते।’ पूरी खबर पढ़िए… पार्ट-2, लाश के सामने एक्ट्रेस ने बनाए शारीरिक संबंध: मॉल से खरीदी चाकू, लाश के टुकड़े थैलियों में भरकर जंगल में जलाए, जानिए कैसे हुए हत्याकांड का खुलासा मारिया की बिल्डिंग के गार्ड ने पूछताछ में बताया कि मारिया 7 मई 2008 की शाम कुछ भारी बैग्स ले जाती दिखी थीं, उस समय उनके बॉयफ्रेंड जेरोम मैथ्यू भी साथ थे, जबकि पूछताछ में जेरोम ने कहा था कि वो मारिया की बिल्डिंग गए ही नहीं थे। विवेक की गुमशुदगी के करीब 2 हफ्ते बाद सख्ती करने पर मारिया ने कहा कि विवेक की हत्या हो चुकी है। जेरोम ने विवेक का कत्ल किया, फिर उन्होंने लाश के सामने एक्ट्रेस का रेप किया। इसके बाद दोनों ने मिलकर लाश के टुकड़े किए और उन्हें ठिकाने लगाया। पूरी कहानी पढ़िए… ……………………………………………………………. पार्ट-1, फार्महाउस गया एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता: एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी बम ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। पूरी खबर पढ़िए... पार्ट-2, जमीन खोदकर निकाले गए एक्ट्रेस के परिवार के 6 कंकाल: एक साल पहले कुत्ते के साथ दफनाया, कातिल तसल्ली होने तक सिर कुचलता रहा लैला खान छुट्टी मनाने फार्महाउस गईं और अचानक लापता हो गईं। जांच में सामने आया कि सिर्फ लैला ही नहीं, उनके परिवार के 6 और लोग लापता हैं। एक साल तक लैला की कोई खबर नहीं मिली और फिर कश्मीर में एक बम ब्लास्ट हुआ, उस जगह के पास ही लैला की मां के नाम पर रजिस्टर्ड कार मिली। जांच में एक्ट्रेस लैला खान के सौतेले पिता परवेज टाक की गिरफ्तारी हुई। परवेज जांच टीम को फार्महाउस ले गया, जहां एक-एक कर 6 कंकाल बरामद किए गए। इनमें परिवार के पालतू कुत्ते का भी कंकाल था। 10 जुलाई 2012 को परवेज टाक को सदर्न मुंबई किला कोर्ट में पेश कर क्राइम ब्रांच ने कस्टडी ली। मामला गंभीर था, तो जांच टीम सख्ती करने से नहीं चूकी। हाथ-पैर बांधकर परवेज टाक को तबीयत से पीटा गया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर फार्महाउस से कंकाल निकाले गए। इससे पहले ही उसने फरवरी 2011 की रात की पूरी कहानी सुना दी थी। पूरी खबर पढ़िए…