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    एअर इंडिया की घरेलू फ्लाइट ₹399 महंगी:भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया; ईरान जंग से जेट फ्यूल के दाम दोगुने

    12 hours ago

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। एअर इंडिया 12 मार्च से घरेलू फ्लाइट टिकटों पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाएगी। यानी टिकट खरीदते समय अब आपको 399 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। वहीं, एअर इंडिया इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भी सरचार्ज लगेगा। ब्लूमबर्ग ने भी अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। भारत समेत एशिया और दुनियाभर की प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं और कई कंपनियां अपने विमानों को ग्राउंडेड करने का प्लान भी बना रही हैं। जानकारों का कहना है कि यह 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट हो सकता है। भारतीय एयरलाइंस आगे किराया और बढ़ा सकती हैं रिपोर्ट के अनुसार, जेट फ्यूल यानी ATF की कीमतों में हो रहे इजाफे को देखते हुए भारत की एविएशन कंपनियां आने वाले दिनों में किराया और भी बढ़ा सकती हैं। एयरलाइंस का कहना है कि ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ने के कारण उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है। जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं 28 फरवरी को शुरू हुई ईरान-इजराइल जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के बाद से तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत आज 93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। वहीं एक दिन पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। वहीं कई मार्केट में जेट फ्यूल की कीमतें संघर्ष शुरू होने के बाद से दोगुनी हो चुकी हैं। जंग से पहले जेट फ्यूल की कीमतें लगभग 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई है। वहीं मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण दुनियाभर में अब तक 40,000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल भी हुई हैं। एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च होता है जेट-फ्यूल जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के चलते दुनिया भर की एयरलाइंस ने न केवल टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि अपने भविष्य के वित्तीय अनुमानों यानी फाइनेंशियल आउटलुक को भी वापस ले लिया है। एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है। तेल की कीमतों में आए इस अचानक बदलाव ने एयरलाइंस के बजट को बिगाड़ दिया है। एयर न्यूजीलैंड और क्वांटास जैसी बड़ी कंपनियों ने भी साफ कर दिया है कि वे बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेंगे। वियतनाम में 70% तक महंगे हो सकते हैं टिकट ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट में बताया कि वियतनाम में स्थिति काफी गंभीर है। वहां की सरकारी एयरलाइन वियतनाम एयरलाइंस ने बताया है कि फ्यूल की बढ़ती कीमतों के कारण उनकी ऑपरेटिंग कॉस्ट में करीब 70% का इजाफा हुआ है। इस वजह से एयरलाइन किराया भी इतना ही बढ़ा सकती है। एयरलाइन ने सरकार से गुहार लगाई है कि जेट फ्यूल पर लगने वाले एनवायरमेंटल टैक्स को हटाया जाए, ताकि कंपनी को कुछ राहत मिल सके और उड़ानें जारी रखी जा सकें। ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने की मुख्य वजह वियतनाम की इम्पोर्टेड जेट फ्यूल पर निर्भरता है। दुनियाभर में इन एयरलाइंस ने भी किराया बढ़ाया एयर न्यूजीलैंड: एयर न्यूजीलैंड ने मंगलवार को अपने टिकटों के दाम में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने घरेलू उड़ानों के लिए एक तरफ का किराया 10 न्यूजीलैंड डॉलर बढ़ा दिया है। वहीं शॉर्ट-हॉल इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए 20 डॉलर और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए 90 डॉलर की बढ़ोतरी की गई है। कंपनी ने 2026 के लिए अपना कमाई का अनुमान भी वापस ले लिया है, क्योंकि मार्केट में भारी अस्थिरता है। हांगकांग एयरलाइंस: हांगकांग एयरलाइंस गुरुवार से फ्यूल सरचार्ज में 35.2% तक की बढ़ोतरी करने जा रही है। मालदीव, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के लिए यह सरचार्ज 284 हांगकांग डॉलर से बढ़ाकर 384 हांगकांग डॉलर कर दिया गया है। वहीं कैथे पैसिफिक ने मार्च में लंदन और ज्यूरिख के लिए एक्स्ट्रा फ्लाइट्स शुरू की हैं ताकि प्रभावित रूट्स के यात्रियों को ऑप्शन मिल सके। कंपनी फिलहाल हर महीने फ्यूल सरचार्ज का रिव्यू कर रही है। क्वांटास और SAS: ऑस्ट्रेलिया की फ्लैग कैरियर क्वांटास एयरवेज ने अपने इंटरनेशनल रूट्स पर किराया बढ़ा दिया है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स 90% से ज्यादा फुल चल रही हैं, इसलिए वे आने वाले महीनों में कैपेसिटी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। नॉर्डिक देशों यानी उत्तरी यूरोप की प्रमुख एयरलाइन SAS (स्कैंडिनेवियन एयरलाइंस) ने भी बढ़ती लागत को देखते हुए अस्थायी प्राइस एडजस्टमेंट लागू किया है। एविएशन सेक्टर में हर तरफ पैनिक की स्थिति है स्पार्टा कमोडिटीज की सीनियर ऑयल मार्केट एनालिस्ट जून गोह ने बताया, एविएशन सेक्टर में हर तरफ पैनिक की स्थिति है। जिन एशियाई एयरलाइंस का हेजिंग प्रोग्राम कमजोर है, वे सबसे ज्यादा मुश्किल में हैं। उन्होंने कम कीमत पर टिकट बेच दिए थे, लेकिन अब उन्हें बहुत महंगे रेट पर फ्यूल खरीदना पड़ रहा है। कुछ लो-कॉस्ट एयरलाइंस तो अब विमानों को खड़ा करने की तैयारी में हैं। क्योंकि मौजूदा फ्यूल कीमतों पर उड़ान भरना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। हालात नहीं सुधरे, तो छोटी एयरलाइंस बंद हो सकती हैं जर्मन बैंक डॉयचे बैंक के एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो दुनिया भर में हजारों विमान खड़े हो सकते हैं और कुछ छोटी एयरलाइंस बंद भी हो सकती हैं। लुफ्थांसा जैसी कंपनियों को मिल सकता है फायदा जहां ज्यादातर एयरलाइंस संकट में हैं, वहीं लुफ्थांसा जैसी कंपनियां इसे मौके के तौर पर देख रही हैं। लुफ्थांसा के CEO कार्सन स्पोह्र ने कहा कि उनकी कंपनी ने फ्यूल प्राइज को हेज किया हुआ है, जिससे उन्हें 'रिलेटिव एडवांटेज' मिलेगा। वे मिडिल ईस्ट की एयरलाइंस के प्रभावित होने का फायदा उठाते हुए एशिया और अफ्रीका के रूट्स पर अपनी क्षमता बढ़ाने का प्लान बना रहे हैं। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सप्लाई बंद: गैस नहीं मिलने से होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत; जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई है। इससे देश में LPG की किल्लत हो रही है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है। गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट्स और होटल बंद होने की नौबत आ गई है। ऐसे में सरकारी सूत्रों का कहना है कि तेल कंपनियां तीन सदस्यी कमेटी के जरिए रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी, ताकि LPG सप्लाई की दिक्कतों को समझा जा सके। पूरी खबर पढ़ें…
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