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    हिलेरी क्लिंटन ने पर्यावरण के खतरों से आगाह किया:बोलीं- जलवायु संकट से महिलाएं सर्वाधिक प्रभावित, शरणार्थियों में सबसे बड़ी संख्या इनकी

    10 hours ago

    मुंबई क्लाइमेट वीक में बुधवार को अमेरिकी पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इंडिया क्लाइमेट कोलैबोरेटिव(आईसीसी) की सीईओ श्लोका नाथ के साथ चर्चा की। इस दौरान हिलेरी ने जलवायु परिवर्तन और महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताया। पढ़िए उनकी बात, उनकी जुबानी। मैं आज अपनी बात महिलाओं से शुरू करना चाहती हूं। अगर हम सच में समझना चाहते हैं कि जलवायु परिवर्तन क्या कर रहा है, तो हमें उन लोगों की तरफ देखना होगा जिन पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है, और वह हैं दुनियाभर की महिलाएं। जब सूखा पड़ता है, बाड़ आती है, खेत बर्बाद होते हैं या जब पानी दूर चला जाता है तो सबसे पहले और सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं होती हैं। उन्हें ही अपने परिवार के लिए पानी लाना होता है, भोजन जुटाना होता है, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करनी होती है। जलवायु परिवर्तन उनके रोजमर्रा के जीवन को और कठिन बना रहा है। आज दुनिया में जलवायु आपदाओं के कारण विस्थापित होने वाले लोग जिन्हें हम क्लाइमेट रिफ्यूजी कहते हैं, उनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है। वे अपने घर अपनी आजीविका और अपनी सुरक्षा खो देती हैं, लेकिन फिर भी उन्हें परिवार को संभालना होता है। मैंने नमक के खेतों में काम करने वाली महिलाओं को देखा है। तपती दोपहर में, झुलसती धूप में बिना किसी विकल्प के काम करती हुई। तापमान बढ़ रहा है, लेकिन उनका श्रम कम नहीं हो रहा है। जलवायु परिवर्तन उनके शरीर, उनके स्वास्थ्य और उनकी आजीविका पर सीधा असर डाल रहा है। यही जलवायु संकट का मानवीय चेहरा है। इसलिए हम महिलाओं को केवल पीड़ित के रुप में नहीं देख सकते हैं वे समाधान का हिस्सा है। जलवायु संकट इंतजार नहीं करता। इसलिए कार्रवाई भी अभी होनी चाहिए। जलवायु परिवर्तनः एआई की भूमिका होगी प्रभावी अब मैं तकनीक पर बात करना चाहती हूं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जलवायु परिवर्तन से लड़ने में एक शक्तिशाली उपकरण बन सकता है। यह नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिड को बेहतर बना सकता है, बाढ़ और आपदाओं का सटीक पूर्वानुमान दे सकता है।
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