Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    हिमांगी सखी बनीं किन्नर शंकराचार्य, पुष्कर में पीठ की घोषणा:भोपाल में कहा- ‘सनातन न मानने वाले पाकिस्तान जाएं’; 60 धर्मांतरित किन्नरों की ‘घर वापसी’

    18 hours ago

    भोपाल में महाशिवरात्रि पर आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में हिमांगी सखी को ‘किन्नर शंकराचार्य’ घोषित करते हुए उनका पट्टाभिषेक किया गया। आयोजन में राजस्थान के पुष्कर को पहली किन्नर शंकराचार्य पीठ घोषित किया गया। कार्यक्रम किन्नर वैष्णव अखाड़ा की ओर से आयोजित किया गया। इसमें किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास सहित विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्मा और किन्नर समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजकों ने दावा किया कि धर्म परिवर्तन कर चुके 60 किन्नरों ने शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया। हालांकि इस दावे की प्रशासनिक स्तर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। देखिए तस्वीरें… पट्टाभिषेक के बाद ये बोली किन्नर शंकराचार्य कौन हैं हिमांगी सखी? हिमांगी सखी, मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हैं और किन्नर समाज में धार्मिक नेतृत्वकर्ता के रूप में जानी जाती हैं। वे पहले महामंडलेश्वर और जगद्गुरु पद पर रह चुकी हैं। अब उन्हें शंकराचार्य की उपाधि प्रदान की गई है। उनका पहला पीठ पुष्कर में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगे देशभर में अलग-अलग स्थानों पर पीठ स्थापित की जाएंगी और शंकराचार्य के रूप में वे किन्नर समाज से जुड़े मामलों के लिए एक टीम गठित करेंगी। 4 जगद्गुरु और 5 महामंडलेश्वर घोषित सम्मेलन में किन्नर परंपरा के अंतर्गत चार जगद्गुरुओं और पांच महामंडलेश्वरों की घोषणा की गई। कार्यक्रम में घोषित जगद्गुरु कार्यक्रम में घोषित महामंडलेश्वर धार्मिक विद्वान की आपत्ति: “परंपरा में चार ही पीठ मान्य” भोपाल में घोषित किन्नर शंकराचार्य पीठ को लेकर ज्योतिष मठ संस्थान से जुड़े पंडित विनोद गौतम ने आपत्ति दर्ज की है। उनका कहना है कि सनातन परंपरा में चार मूल पीठों की ही व्यवस्था है और उसी के अनुरूप शंकराचार्य पद की मान्यता तय होती है। गौरतलब है कि परंपरा के अनुसार आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठ माने जाते हैं— ज्योतिर्मठ (उत्तराखंड), श्रृंगेरी शारदा पीठ (कर्नाटक), गोवर्धन मठ (ओडिशा) और द्वारका शारदा पीठ (गुजरात)। पंडित गौतम ने कहा कि पारंपरिक मठ व्यवस्था के अनुसार चार ही पीठों के शंकराचार्य मान्य हैं। ऐसे में नए पीठ या पांचवें शंकराचार्य की मान्यता पर प्रश्न उठते हैं। अखाड़ा व्यवस्था पर सवाल उन्होंने यह भी कहा कि अखाड़ों की संख्या परंपरागत रूप से 13 मानी जाती है और किन्नर अखाड़ा उसी संरचना के अंतर्गत उप-अखाड़े के रूप में जोड़ा गया है। उनके अनुसार अखाड़ा परिषद की मान्यता और परंपरागत प्रक्रिया के बिना शंकराचार्य पद की स्वीकृति संभव नहीं है। “पद की गरिमा का विषय” पंडित गौतम ने कहा कि शंकराचार्य पद की नियुक्ति एक निश्चित धार्मिक प्रक्रिया से होती है, जिसमें वेद-वेदांत का ज्ञान, संन्यास परंपरा और दंडी परंपरा का पालन शामिल है। उन्होंने कहा कि इस पद की गरिमा और प्रतिष्ठा को बनाए रखना आवश्यक है।
    Click here to Read More
    Previous Article
    मोदी बोले-यह बजट मजबूरी नहीं, ‘हम तैयार हैं’ वाला पल:कहा- 38 देशों से FTA पर बातचीत जारी, राजनीतिक स्थिरता से निवेशकों का भरोसा बढ़ा
    Next Article
    🔴 IND vs PAK Live Match Today, World Cup, Live Cricket Scores Commentary, India vs Pakistan

    Related भारत Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment