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    होर्मुज बंद नहीं होगा पर महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल:4-5 रुपए बढ़ सकते है दाम; सोना ₹30 हजार बढ़ने की उम्मीद; अमेरिका-ईरान जंग का असर

    11 hours ago

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि फिलहाल होर्मुज जलमार्ग को बंद करने का कोई इरादा नहीं है। एक दिन पहले जब अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे तो आशंका जताई जा रही थी कि ईरान होर्मुज को बंद कर सकता है। अगर होर्मुज बंद होता तो कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते थे। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर दिख सकता था। हालांकि एक्सपर्ट अभी भी मान रहे है कि कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी का जोखिम अभी भी बना हुआ है। इसकी तीन वजहे हैं… अब आम लोगों पर इसका असर जानें… 1. भारत में पेट्रोल-डीजल 4-5 रुपए बढ़ सकते हैं.. पेट्रोल डीजल: दिल्ली में पेट्रोल ₹95 लीटर से बढ़कर ₹100 तक पहुंच सकता है। वहीं डीजल ₹88 से बढ़कर ₹92 तक जा सकता है। अन्य शहरों में भी इसी तरह से दाम बढ़ सकते हैं। पहले जब होर्मुज के बंद होने की खबरें आई थी तब एक्सपर्ट अनुमान लगा रहे थे कि कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं और पेट्रोल का भाव 105 रुपए तक पहुंच सकता है। अब ईरान के विदेश मंत्री के बयान के बाद एक्सपर्ट कच्चे तेल के 100 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगा रहे हैं। इसी आधार पर पेट्रोल-डीजल के रेट अनुमान में भी थोड़ी कमी की गई है।। भारत अपनी जरूरत का 90% तेल आयात करता है। इसमें से करीब 50% क्रूड होर्मुज के रास्ते आता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये रास्ता पूरी तरह से या थोड़ा बहुत ब्लॉक करता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई घट जाएगी और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी। कंपनियां कीमतें बदलने के लिए स्वतंत्र, लेकिन अंतिम फैसला सरकार के हाथ में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सरकारी तेल कंपनियां तय करती हैं। पिछले 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की औसत कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति पर निर्भर करती हैं। हालांकि कंपनियां बेस प्राइस तय करती हैं। आम आदमी तक पहुंचने वाली अंतिम कीमत में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के टैक्स का बड़ा हिस्सा होता है। यानी, तेल कंपनियां दाम बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन असल में अंतिम फैसला सरकार के रुख पर निर्भर करता है। जब भी युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो सरकार राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कंपनियों को कीमतें न बढ़ाने का सुझाव दे सकती है या फिर खुद टैक्स घटाकर बढ़ी हुई कीमतों का बोझ जनता पर पड़ने से रोक सकती है। 2. सोना-चांदी: कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख रुपए तक जा सकता है। चांदी 2.67 लाख रुपए किलो है जो बढ़कर 3.50 लाख तक पहुंच सकती है। युद्ध के समय निवेशक 'सोने' को सुरक्षित मानते हैं। 3. शेयर बाजार: इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट मनोरंजन शर्मा के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव अचानक बहुत बढ़ गया है। इसका दुनिया की एनर्जी सिक्योरिटी और आर्थिक स्थिरता पर काफी बुरा असर पड़ा है। शर्मा ने कहा, सोमवार को बाजार के गिरावट के साथ खुलने की उम्मीद है और काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बाजार में शॉर्ट-टर्म के लिए करीब 1–1.5% की गिरावट आ सकती है। इसमें ऑटोमोबाइल, बैंकिंग-फाइनेंस और FMCG सेक्टर पर दबाव बना रहेगा। युद्ध जैसे तनाव के समय निवेशक बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित जगह निवेश करते हैं। निवेशक फिजिकल गोल्ड या गोल्ड बॉन्ड में पैसा लगाते हैं क्योंकि इसे सबसे सुरक्षित माना जाता है। अब होर्मुज स्ट्रेट को जानें… होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। ईरान के अलावा सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत के कुल 'नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट' का 10% से ज्यादा हिस्सा इसी रास्ते से सप्लाई होता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग का सामान शामिल है। हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है। ईरान खुद रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है। होर्मुज बंद हुआ तो ईरान को भी नुकसान होगा सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरानी सेना जवाबी कार्रवाई के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाना और इजराइली इलाकों पर हमला करना शामिल है। लेकिन ईरान के पास सबसे बड़ा 'जियोपॉलिटिकल हथियार' होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना है। इससे वो पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर दबाव बना सकता है। हालांकि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से ईरान की अपनी इकोनॉमी भी तबाह हो सकती है क्योंकि वह खुद अपना तेल एक्सपोर्ट नहीं कर पाएगा। इसके अलावा, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है।अगर सप्लाई बाधित होती है तो चीन के साथ रिश्ते बिगड़ सकते हैं। सऊदी अरब के पास 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' होर्मुज स्ट्रेट के विकल्प के तौर पर सऊदी अरब के पास 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' है। यह 746 मील लंबी पाइपलाइन देश के एक छोर से दूसरे छोर (रेड सी टर्मिनल) तक जाती है। इसके जरिए रोजाना 50 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जा सकता है। भारत और अन्य एशियाई देश इस तरह के वैकल्पिक रास्तों और सुरक्षित भंडारों पर नजर बनाए हुए हैं। भारत दूसरे देशों से बढ़ा रहा तेल का इम्पोर्ट सरकार इस संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारत खाड़ी देशों के बाहर के सप्लायर्स से तेल की खरीदारी बढ़ा रहा है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर भारत अपने 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) से भी तेल निकाल सकता है। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ईरान-इजराइल जंग से क्या पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे:सोना-चांदी के दाम बढ़ेगे; समुद्री रूट बंद हुआ तो कच्चे तेल की सप्लाई पर संकट अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसके बाद ईरान में 40 दिन का शोक घोषित किया गया है। रविवार सुबह लोग सड़कों पर रोते और बिखलते नजर आए। सरकार से जवाबी कार्रवाई का नारा लगाते दिखे। पूरी खबर पढ़े…
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