Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    इजराइल-ईरान-जंग के बीच भारत के पास 25-दिन का तेल बचा:सरकार नए सप्लायर्स की तलाश में; फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे

    8 hours ago

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत सरकार ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत के पास वर्तमान में सिर्फ 25 दिनों का क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक अवेलेबल है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और कच्चे तेल, LPG और LNG के लिए वैकल्पिक देशों से बातचीत कर रही है, ताकि सप्लाई चेन में कोई रुकावट न आए। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का अभी कोई प्लान नहीं आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि सरकार का फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में प्रमुख पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अवेलेबिलिटी और किफायती दाम तय करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सोमवार को पेट्रोलियम मंत्री ने रिव्यू मीटिंग की थी इससे पहले सोमवार को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी तेल कंपनियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की थी। इस बैठक में कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई स्थिति की समीक्षा की गई। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि वे बदलती परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर असर को लेकर सरकार एक्टिव सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सरकार एक्टिव है। वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन मीटिंग की थी। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव का भारत के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट और कार्गो फ्लो पर क्या असर पड़ सकता है। शिपिंग रूट और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ने की चुनौती बैठक में लॉजिस्टिक ऑपरेटर्स और शिपिंग लाइन्स के प्रतिनिधियों ने बताया कि मौजूदा तनाव के कारण जहाजों के रूट बदलने पड़ रहे हैं, जिससे ट्रांजिट टाइम बढ़ गया है। इसके अलावा, माल ढुलाई और इंश्योरेंस की लागत में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सरकार ने एक्सपोर्टर्स और इंपोर्टर्स के लिए डॉक्यूमेंटेशन और पेमेंट प्रोसेस को आसान बनाने और कार्गो मूवमेंट में देरी को कम करने पर जोर दिया है। पश्चिम एशिया पर भारत की निर्भरता बड़ी भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 85% इंपोर्ट करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी हलचल का सीधा असर भारत की इकोनॉमी और एनर्जी सिक्योरिटी पर पड़ता है। सरकार अब रूस और अन्य अफ्रीकी देशों जैसे वैकल्पिक रास्तों पर फोकस बढ़ा रही है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके। ये खबर भी पढ़ें… भारत फिर बढ़ाएगा रूस से कच्चे तेल की खरीद: 95 लाख बैरल तेल पर नजर; ईरान-इजराइल जंग के बीच स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से सप्लाई रुकी मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल के बीच जंग और तेल की सप्लाई चेन प्रभावित होने के बाद भारत ने एक बार फिर रूस की ओर रुख किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का प्लान बना रहा है। पिछले कुछ दिनों में स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिसके चलते सरकारी रिफाइनरीज और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने दिल्ली में एक इमरजेंसी मीटिंग कर विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
    Click here to Read More
    Previous Article
    Israel Iran War Live Updates: Iran Guards Warn 'Gates Of Hell Will Open More' On US, Israel
    Next Article
    ‘Serious Consequences’: India Flags Risks From Escalating West Asia Crisis

    Related व्यापार Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment