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    कच्चा तेल 9% सस्ता होकर 88 डॉलर पर आया:ट्रम्प के 'युद्ध खत्म' होने वाले बयान का असर, एशियाई शेयर बाजारों में 6% तक बढ़त

    9 hours ago

    ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आज यानी 10 बड़ी गिरावट देखने को मिली है। एशिया में शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 8.5% गिरकर 92.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं। इससे पहले कल ये 115 डॉलर के पास चला गया था। वहीं अमेरिकी तेल (WTI) भी करीब 9% टूटकर 88.60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। तेल की कीमतों में यह कमी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने जंग जल्द खत्म होने की बात कही थी। 11 दिनों में कच्चे तेल की कीमत ट्रम्प बोले- जल्द खत्म होगा युद्ध कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट की मुख्य वजह डोनाल्ड ट्रम्प का ताजा बयान माना जा रहा है। सोमवार को ट्रम्प ने कहा था कि चल रहा युद्ध 'बहुत जल्द' खत्म हो जाएगा। उनके इस बयान से ग्लोबल सप्लाई चेन को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई थी, उसमें कमी आई है और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। हालांकि, मौजूदा कीमतें अब भी युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर के मुकाबले करीब 30% ज्यादा बनी हुई हैं। एशियाई शेयर बाजारों में तेजी, निक्केई 2.8% चढ़ा तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर एशियाई शेयर बाजारों पर पॉजिटिव रूप से दिखा है। मंगलवार सुबह जापान का बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 करीब 2.8% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। वहीं, दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5% से ज्यादा उछल गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सस्ता तेल एशियाई इकोनॉमी के लिए बूस्टर का काम करता है क्योंकि इस क्षेत्र के अधिकांश देश खाड़ी देशों से तेल के बड़े खरीदार हैं। भारत जैसे तेल आयातकों को मिलेगी राहत एशियाई बाजारों में आई इस तेजी के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि हाल के दिनों में तेल की बढ़ती कीमतों ने इन देशों की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया था। भारत, चीन और जापान जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर हैं। तेल सस्ता होने से इन देशों का इम्पोर्ट बिल कम होगा और महंगाई को काबू करने में मदद मिलेगी। युद्ध के कारण 30% तक बढ़ी थीं कीमतें बता दें कि पिछले कुछ समय से चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का डर था। इसी वजह से कीमतों में लगातार उछाल आ रहा था। संघर्ष की शुरुआत से अब तक तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर तक पहुंच गई थीं।
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