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    लिव-इन में रहने के बाद रेप का आरोप गलत:एमपी हाईकोर्ट ने व्यापारी को किया बरी; कहा- सहमति से बने संबंधों में FIR उचित नहीं

    1 day ago

    दो वयस्क महिला-पुरुष यदि अपनी मर्जी से लिव-इन में रहते हैं। आपसी सहमति से संबंध बनाते हैं, लेकिन बाद में विवाद होने पर यदि महिला रेप की शिकायत दर्ज कराती है तो यह उचित नहीं है। यह कहते हुए एमपी हाईकोर्ट ने रेप केस में फंसे कटनी के कपड़ा व्यापारी को राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने यह फैसला 17 मार्च को सुनाया। मामला कटनी के कपड़ा व्यापारी मुकेश ठाकुरानी से जुड़ा है। इनके खिलाफ एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी और तलवार के बल पर रेप किया। पत्नी से हुआ विवाद, फिर युवती आई जिंदगी में कटनी के माधव नगर निवासी मुकेश ठाकुरानी (35) कपड़ा व्यवसायी हैं। वर्ष 2003 में उनका विवाह हुआ। उनके दो बच्चे हैं। 5 मई 2019 को किसी बात को लेकर पत्नी से विवाद हो गया, जिसके बाद पत्नी बच्चों को लेकर मायके चली गई और पति के खिलाफ दहेज व भरण-पोषण का केस दर्ज कर दिया। इसी बीच 10 मई 2019 को कोर्ट के काम के दौरान मुकेश की मुलाकात कटनी में रहने वाली 24 वर्षीय युवती से हुई। वह भी अपने पति के खिलाफ चल रहे मुकदमे के सिलसिले में कोर्ट आती थी। कोर्ट में दोनों की अकसर बातचीत होने लगी। युवती ने बताया कि उसका पति उसे परेशान करता है, जिसके खिलाफ उसने शिकायत दर्ज कराई है। मुकेश के वैवाहिक विवाद की जानकारी मिलने पर वह उसके और करीब आ गई। दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। युवती का कहना था कि अब सरकार भी लिव-इन रिलेशन को मान्यता देती है, इसलिए वे साथ रह सकते हैं। आगे चलकर दोनों अपने-अपने जीवन साथियों से तलाक लेकर शादी कर सकते हैं। इसके बाद दोनों गोवा, भेड़ाघाट और मैहर घूमने भी गए। लिव-इन की शुरुआत ठीक, फिर बढ़ा विवाद और बिगड़े रिश्ते मुकेश युवती के साथ लिव-इन में रहने को तैयार हो गया। 1 सितंबर 2019 को युवती अपनी मां और दो साल की बेटी के साथ मुकेश के घर आकर रहने लगी। शुरुआती कुछ दिन ठीक रहे, लेकिन समय बीतने के साथ दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। इसी दौरान घर से लगातार नकदी और जेवरात गायब होने लगे। इस बारे में पूछने पर मुकेश और युवती के बीच विवाद बढ़ने लगा। याचिकाकर्ता के अनुसार, घर से करीब 15 लाख रुपए कैश और सोना गायब हो गया। जब इस संबंध में युवती से पूछताछ की गई तो उसने विवाद करना शुरू कर दिया। युवती ने मार्च 2020 में यह कहते हुए मुकेश का घर छोड़ दिया कि अब वह उसे जेल भिजवाएगी। एफआईआर के बाद अगले ही दिन गिरफ्तारी, जेल भेजा गया मुकेश का घर छोड़कर युवती अपने पति के घर लौट गई। 25 जुलाई 2020 को उसने कटनी के महिला थाने में मुकेश ठाकुरानी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2)(n), 377, 294 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज करवाई। युवती ने आरोप लगाया कि मुकेश ने उसका वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी और उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने यह भी कहा कि शादी का झांसा देकर मुकेश ने कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। साथ ही नाबालिग बेटी को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर उसके साथ जबरन यौन और अप्राकृतिक कृत्य किए। पुलिस ने अगले दिन 26 जुलाई 2020 को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से मुकेश को जेल भेज दिया गया। 20 अगस्त 2020 को 25 दिन तक कटनी जेल में रहने के बाद मुकेश को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। लिव-इन के बाद दुष्कर्म का आरोप, हाईकोर्ट में दी चुनौती मर्जी से लिव-इन रिलेशन में रहने के बावजूद युवती ने कपड़ा व्यापारी पर दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में शिकायत दर्ज कराई थी। इसे चुनौती देते हुए व्यापारी ने हाईकोर्ट में कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं। पुलिस जांच में भी सामने आया कि मुकेश के मोबाइल में ऐसा कोई वीडियो नहीं मिला, जिसके आधार पर वह युवती को ब्लैकमेल कर रहा हो। इसके अलावा, घर की तलाशी के दौरान भी कोई तलवार बरामद नहीं हुई। सीनियर वकील बोले- संबंध सहमति से, आरोप निराधार याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच संबंध सहमति से थे। पीड़िता एक विवाहित महिला है, जिसकी एक बच्ची है और वह अपने पति से अलग रह रही है। वह इस तथ्य से भली-भांति अवगत थी कि तलाक मिलने तक वह दूसरा विवाह नहीं कर सकती, जैसा कि उसके सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज बयान से स्पष्ट है। आपत्तिजनक स्थिति में अश्लील वीडियो बनाए जाने के आरोप के संबंध में साइबर सेल को कोई भी सबूत नहीं मिला, जो पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र से भी स्पष्ट है। इसलिए युवती का यह आरोप कि पत्नी को तलाक देने के झूठे आश्वासन पर उसे रिश्ते में फंसाया गया, असत्य है। डेढ़ साल तक रहे शारीरिक संबंध, दोनों थे विवाहित याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त ने कोर्ट को बताया कि युवती और उसके पति ने समाज में अपनी छवि बचाने के लिए दोबारा साथ आकर झूठी एफआईआर दर्ज कराई है। याचिकाकर्ता के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप झूठे और निराधार हैं। विशेष रूप से यह तथ्य सामने आया कि पहले से विवाहित दो व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से संबंध बने थे, जिनमें समय के साथ दरार आ गई और वे स्वतः समाप्त हो गए। यह स्थिति याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आधार नहीं हो सकती। विवाह का आश्वासन अवास्तविक, आरोप निराधार कोर्ट को बताया गया कि विवाह के आश्वासन का आरोप भी निराधार है, क्योंकि युवती पहले से विवाहित थी और उसका एक बच्चा भी था, इसलिए ऐसा वादा स्वाभाविक रूप से अवास्तविक था। साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत जबरदस्ती या चोट पहुंचाने की धमकी के संबंध में भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने पाया- आरोप सही नहीं, एफआईआर रद्द सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त ने बताया कि जस्टिस बी.पी. शर्मा की कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। यदि कोई महिला अपनी मर्जी से किसी के साथ रहती है। बाद में उसी व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कराती है तो यह उचित नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया।
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