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    पिता की मारकर शव के टुकड़े नीले ड्रम में छिपाए:वजह- पापा डॉक्टर बनाना चाहते, बेटे को लखनऊ में होटल खोलना था

    18 hours ago

    लखनऊ में वर्धमान पैथोलॉजी लैब के मालिक मानवेंद्र सिंह की उनके 21 साल के इकलौते बेटे अक्षत ने गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को आरी से काटकर टुकड़े नीले ड्रम में भर दिए। सिर को काटकर कार में रखा और घरसे 21 किलोमीटर दूर फेंक आया। अक्षत ने अपनी बहन के सामने घटना को अंजाम दिया। उसे धमकी दी कि किसी को बताया तो उसे भी मार डालेगा। पिता का सिर फेंकने के बाद आरोपी घर लौटा और कार की सफाई की। तीन दिन बाद सोमवार को वह थाने पहुंचा और गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने जब पूछताछ शुरू की तो बेटा घबराया नजर आया। शक होने पर सख्ती से पूछताछ की गई, तब उसने जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस उसे लेकर मौके पर पहुंची और शव के टुकड़े बरामद किए, लेकिन सिर नहीं मिला। आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसके पिता चाहते थे कि वह NEET क्वालीफाई करके MBBS करे। वह इस बात पर अड़ा था कि MBBS के लिए उस पर जबरदस्ती न की जाए। वह पिता से कहता था कि पैथोलॉजी लैब की जगह लॉन या रेस्टोरेंट खोला जाए, जो ज्यादा अच्छा बिजनेस रहेगा। इसी बात को लेकर 20 फरवरी को पिता से बहस हुई। गुस्से में उसने पिता की लाइसेंसी राइफल से गोली मार दी। वारदात आशियाना कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-L की है। मृतक मानवेंद्र सिंह पैथोलॉजी लैब के अलावा शराब कारोबार से भी जुड़े थे। वारदात से जुड़ी तस्वीरें देखिए- आरोपी बीकॉम का छात्र, मां की मौत हो चुकी है मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन जिले के रहने वाले थे। उनके पिता सुरेंद्र पाल सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस से रिटायर्ड हैं। कई साल पहले मानवेंद्र आशियाना सेक्टर-L में मकान बनवाकर रहने लगे थे। नौ साल पहले पत्नी का निधन हो गया था। तब से वह बेटे अक्षत और बेटी कृति (17) की खुद ही देखभाल करते थे। आरोपी अक्षत बीकॉम का छात्र है। कृति एपीएस में 11वीं की छात्रा है। मानवेंद्र का छोटा भाई एसएस रजावत उत्तर प्रदेश पुलिस में हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती सचिवालय में है। तीन मंजिला घर की ऊपरी मंजिल पर पिता, बेटा और बेटी रहते थे। सेकेंड फ्लोर पर आरोपी के चाचा-चाची रहते थे। सबसे निचले फ्लोर पर पार्किंग और गेस्ट रूम है। बहन को धमकाया-जान से मार डालूंगा आरोपी बेटे के मुताबिक, 20 फरवरी को सुबह 4:30 बजे उसने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मारी। उस वक्त बहन भी मौजूद थी। बहन ने चिल्लाने की कोशिश की तो उसे धमकाया। कहा- अगर तुमने किसी से घटना के बारे में बताया तो जान से मार डालूंगा। इसके बाद उसके घर से बाहर नहीं निकलने दिया। आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने का प्लान बनाया। पिता की लाश को तीसरे फ्लोर से ग्राउंड फ्लोर पर लाकर खाली कमरे में रखा। फिर बाजार से आरी खरीदकर लाया और शव के कई टुकड़े किए। सिर और कुछ टुकड़ों को कार में डालकर सदरौना गांव में फेंक दिया। बाकी हिस्सों को पॉलीथिन में पैक कर नीले ड्रम में भर दिया। वारदात के 3 दिन बाद थाने पहुंचा, हाव-भाव से पुलिस को शक हुआ पुलिस के मुताबिक, वारदात के तीन दिन बाद सोमवार को आरोपी बेटा आशियाना थाना पहुंचा और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने पुलिस को बताया कि उसके पिता 20 फरवरी की सुबह 6 बजे दिल्ली जाने की बात कहकर निकले थे और 21 फरवरी की दोपहर तक लौटने की बात कही थी, लेकिन अब तक वापस नहीं आए हैं। उनके तीनों मोबाइल नंबर लगातार बंद आ रहे हैं। पुलिस ने जब मानवेंद्र को ढूंढना शुरू किया और बेटे से पूछताछ की तो उसके हावभाव संदिग्ध लगे। सख्ती से पूछने पर पहले उसने बताया कि पिता ने आत्महत्या कर ली है। और कड़ाई की गई तो उसने हत्या करने की बात कबूल कर ली। राइफल गद्दे के नीचे छिपाई थी पिता की हत्या के बाद अक्षत ने राइफल गद्दे के नीचे छिपा दी थी। पुलिस उसे लेकर घर पहुंची। शव को कब्जे में लिया गया तो केवल आधा शरीर मिला, बाकी अंग गायब थे। पूछताछ में उसने बताया कि शरीर के टुकड़े कर काकोरी इलाके के सदरौना में फेंक दिए हैं। करीब आठ घंटे तक पुलिस घर में मौजूद रहकर जांच करती रही। देर रात शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पड़ोसी बोले- रिजर्व रहता था, चार साल पहले घर से भाग गया था पड़ोस में रहने वाले मानवेंद्र सिंह के दोस्त धर्मेंद्र सिंह ने बताया किअक्षत मोहल्ले में किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता था। अगर कभी आमना-सामना हो जाता तो नमस्ते कर लेता था। मोहल्ले में उसकी किसी से दोस्ती नहीं थी। चार साल पहले अक्षत घर से भाग गया था। उस दौरान वह छह पन्नों का एक पत्र लिखकर गया था। उसमें उसने लिखा था कि वह MBBS नहीं करना चाहता और उसके साथ जबरदस्ती न की जाए। उसने पैथोलॉजी लैब बंद कर लॉन या रेस्टोरेंट खोलने की सलाह भी दी थी। बाद में पिता के समझाने पर वह एक दिन में ही लौट आया। मानवेंद्र सिंह बेटे से बिल्कुल अलग स्वभाव के थे। वह मोहल्ले में सभी से बातचीत करते थे और सबको जोड़कर चलने वाले व्यक्ति थे। हर त्योहार को उत्साह के साथ मनाते थे और कोई न कोई आयोजन करते रहते थे। पार्क में रामलीला का आयोजन भी करवाते थे, जिसमें अक्षत मेघनाद का रोल करता था। उसी दौरान वह सबके साथ घुल-मिलकर रहता था। ‘19 फरवरी के बाद नहीं दिखे मानवेंद्र’ धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि 19 फरवरी को उनकी मानवेंद्र से आखिरी मुलाकात हुई थी। वह एक दावत से लौटकर आए थे। इसके बाद जब अगले दिन से वह किसी को दिखाई नहीं दिए तो बेटे से पूछा गया। उसने बताया कि पिता दिल्ली गए हैं। बाप-बेटे में अक्सर विवाद होता था, इसलिए लोगों को लगा कि वह नाराज होकर चले गए होंगे। लेकिन दो दिन बीतने के बाद फिर जानकारी ली गई, तब भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद जब दोबारा पूछा गया तो बेटे ने कहा कि पिता लापता हो गए हैं और वह आसपास के इलाकों में उनकी तलाश कर रहा है। आज के हर घटनाक्रम अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग पढ़िए…
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