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    रसोई-गैस का विकल्प बनेगा एथेनॉल:सरकार बना रही खास एथेनॉल-चूल्हे; LPG की किल्लत दूर करने के लिए फैसला किया

    2 days ago

    भारत में अब रसोई गैस (LPG) की निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल का इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही है। सरकार एथेनॉल बेस्ड कुकिंग स्टोव (चूल्हे) बनाने पर काम रही है। मंगलवार को फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एथेनॉल न केवल गाड़ियों के लिए, बल्कि अब घरों की रसोई के लिए भी एक सुरक्षित और सस्ता विकल्प बन सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव से LPG की किल्लत बढ़ी संजीव चोपड़ा ने बताया कि हाल के दिनों में पश्चिम एशियाई देशों में चल रहे संघर्ष की वजह से भारत में गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के जरिए होने वाले शिपमेंट्स रुकने से जमीनी स्तर पर एलपीजी की कमी महसूस की जा रही है, जिससे कीमतें भी बढ़ी हैं। इसी संकट को देखते हुए सरकार अब घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले एथेनॉल को कुकिंग फ्यूल (खाना पकाने के ईंधन) के रूप में प्रमोट कर रही है। शुरुआती दौर में है एथेनॉल चूल्हे का प्रोजेक्ट सचिव ने बताया कि एथेनॉल आधारित चूल्हों के कुछ शुरुआती मॉडल तैयार कर लिए गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह प्रोजेक्ट अभी बेहद शुरुआती चरण में है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम इसे बड़े पैमाने पर लागू करते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह पूरी तरह सुरक्षित हो और इसकी उपलब्धता भी बनी रहे।’ कैसे काम करेगा एथेनॉल चूल्हा? ईंधन: इसमें तरल एथेनॉल का इस्तेमाल होता है। फायदा: यह LPG के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाता है और इसे स्टोर करना आसान होता है। सुरक्षा: एथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील होता है, इसलिए इसके चूल्हों में खास तरह के सेफ्टी वॉल्व और बर्नर डिजाइन किए जा रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में ही पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा सरकार इसकी सप्लाई चैन को परखने के लिए एक प्रयोग करने जा रही है। इसके तहत देश के एथेनॉल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में ही एथेनॉल कुकिंग का टेस्ट किया जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि बिना किसी रूकावट के ईंधन को घरों तक कैसे पहुंचाया जा सकता है। 30% ब्लेंडिंग का लक्ष्य पूरा, अब डिमांड बढ़ाने पर जोर देश में एथेनॉल प्रोग्राम को लेकर चोपड़ा ने बताया कि सप्लाई के मामले में हमने अच्छा काम किया है। अब तक 30% एथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अब सप्लाई की कोई कमी नहीं है, इसलिए सरकार का फोकस डिमांड बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा, ‘हम डीजल के साथ एथेनॉल की ब्लेंडिंग और टेक्सटाइल बाई-प्रोडक्ट्स जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।’ सरकार बेहतर चावल देगी, टूटे हुए चावल से एथेनॉल बनेगा सरकार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के जरिए दिए जाने वाले चावल की क्वालिटी में भी सुधार कर रही है। 5 राज्यों में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसमें मिलों से निकलने वाले चावल में टूटे हुए चावल की मात्रा 25% से घटाकर 10% की गई है। इससे राशन कार्ड धारकों को बेहतर क्वालिटी का चावल मिलेगा। इस प्रक्रिया के दौरान जो अतिरिक्त टूटा हुआ चावल निकलेगा, उसे एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई किया जाएगा। टूटे हुए चावल की सप्लाई बढ़ाने पर विचार कर रही सरकार एथेनॉल बनाने के लिए टूटे हुए चावल की कम मांग पर संजीव चोपड़ा ने कहा कि तेल कंपनियों (OMC) की ओर से आवंटन कम होने के कारण ऐसा हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जैसे ही तेल कंपनियां आवंटन बढ़ाएंगी, डिमांड की समस्या खत्म हो जाएगी। साथ ही FCI के चावल के बजाय सीधे ब्रोकन राइस के इस्तेमाल से एथेनॉल प्रोडक्शन को और मजबूती मिलेगी। यह खबर भी पढ़ें… गोल्डमैन सैक्स ने भारत का GDP ग्रोथ अनुमान घटाया: 2026 में 7% की जगह 5.9% रह सकती है; तेल सप्लाई रुकने से खतरा बढ़ा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने साल 2026 के लिए भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ (GDP) का अनुमान घटा दिया है। बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की जीडीपी ग्रोथ अब 5.9% रहने की उम्मीद है। ईरान युद्ध से पहले इसके 7% रहने का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि रुपए की कमजोरी और महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज दरों में 0.50% की बढ़ोतरी कर सकता है। इससे पहले 13 मार्च को भी बैंक ने ग्रोथ अनुमान 7% से घटाकर 6.5% किया था, जिसे अब और कम कर दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
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