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    वॉशिंगटन में ट्रम्प-एपस्टीन की टाइटैनिक पोज में स्टैच्यू:किंग ऑफ द वर्ल्ड नाम रखा गया, पहले भी बन चुका है ऐसा स्टैच्यू

    14 hours ago

    अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में डोनाल्ड ट्रम्प और जेफ्री एपस्टीन का एक स्टायर स्टैच्यू लगाया गया हैं। स्टेचू करीब 12 फीट ऊंची और गोल्ड कलर की है। जेफ्री एपस्टीन आगे और ट्रम्प उनके पीछे हाथ फैलाकर खड़े दिखाए गए हैं। यह पोज हॉलीवुड कि फिल्म टाइटैनिक के मशहूर सीन की है। इसका नाम ‘किंग ऑफ द वर्ल्ड’ रखा गया है। यह इंस्टॉलेशन एक गुमनाम कलाकार समूह ‘द सीक्रेट हैंडशेक’ ने नेशनल मॉल के पास किया है। जो वॉशिंगटन मॉन्यूमेंट की ओर फेस करके लगाया गया था। मूर्ति के साथ लगे एक स्लैब पर ट्रम्प और एपस्टीन के रिश्ते को मजाकिया अंदाज में सैड लव स्टोरी बताया गया है, जिसमें आलीशान यात्राओं और पार्टियों का जिक्र किया गया है। स्टेचू के आसपास बैनर भी लगाए गए हैं, जिन पर दोनों की तस्वीरों के साथ 'मेक अमेरिका सेफ अगेन' जैसे नारे लिखे हैं। यह स्टेचू सोशल मीडिया पर भी यह काफी वायरल हो रहा है। स्थानीय लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। कुछ लोग इसे राजनीतिक कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इसे आपत्तिजनक बताया है। हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से इस पर आधिकारिक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आखिर टाइटैनिक पोज क्या हैं और क्यों इसका इस्तेमाल किया गया टाइटैनिक फिल्म के इस सीन में जैक जहाज के अगले हिस्से पर खड़े होकर अपना हाथ फैलते है और उसके सामने रोज खड़ी होती है। उस वक्त जैक कहता है – “मैं दुनिया का राजा हूं।” विशेषज्ञों का कहना है कि कलाकारों ने इस पोज को लेकर मूर्ति बनाई ताकि यह एक राजनीतिक स्टायर के रूप में दिखे। इसमें डोनाल्ड ट्रम्प और जेफरी एपस्टीन को उसी अंदाज में एक संदेश देने की कोशिश की गई है। इसलिए इस कला का नाम भी ‘किंग ऑफ द वर्ल्ड’ रखा गया है। पहले भी लग चुकी है ऐसी मूर्ति यह पहली बार नहीं है जब इस समूह ने ऐसा इंस्टॉलेशन किया हो। 2025 में इसी समूह ने बेस्ट फ्रेंड फारेवर नाम की मूर्ति लगाई थी, जिसमें ट्रम्प और एपस्टीन को हाथ पकड़कर खड़े दिखाया गया था। एक अन्य इंस्टॉलेशन में ट्रम्प के नाम से कथित जन्मदिन संदेश की बड़ी मूर्ति भी लगाई गई थी। जेफ्री एपस्टीन कौन था? जेफ्री एपस्टीन अमेरिका का फाइनेंसर था, जिस पर नाबालिग लड़कियों की सेक्स ट्रैफिकिंग और यौन शोषण का नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप लगे थे। 2019 में उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसी साल न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। ट्रम्प का नाम इसलिए जुड़ा क्योंकि 1990 के दशक और शुरुआती 2000 के दौर में ट्रम्प और एपस्टीन को कुछ सामाजिक कार्यक्रमों और पार्टियों में साथ देखा गया था। हालांकि बाद में ट्रम्प ने कहा कि उनका एपस्टीन से काफी समय पहले ही संबंध खत्म हो गया था और उन्होंने उसे अपने क्लब मार-ए-लागो से बैन कर दिया था। एपस्टीन फाइलमें कुछ भारतीय नाम भी सामने आए जेफ्री एपस्टीन से जुड़े कुछ ईमेल में भारत और भारतीय मूल के कुछ लोगों के नामों का जिक्र हुआ है। इनमें दीपक चोपड़ा, अनिल अंबानी, हरदीप सिंह पुरी, मीरा नायर और अनुराग कश्यप जैसे नाम शामिल बताए जाते हैं। हालांकि इनका जिक्र केवल संपर्क या बातचीत के संदर्भ में सामने आया है और किसी के खिलाफ अपराध में शामिल होने का आरोप साबित नहीं हुआ है।
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