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    भास्कर अपडेट्स:केरल में वैन से विस्फोटक भरे 100 से ज्यादा बॉक्स मिले, तरबूज के नीचे छिपाकर ले जा रहा था चालक

    1 month ago

    केरल के पलक्कड़ में बुधवार रात पुलिस ने एक पिकअप वैन से बड़ी मात्रा में विस्फोटक जब्त किए। वैन में तरबूज की खेप के नीचे छिपाकर 100 से ज्यादा बॉक्स में जिलेटिन स्टिक और 20 से अधिक बॉक्स में डेटोनेटर रखे गए थे। पुलिस ने चालक को हिरासत में ले लिया है। पलक्कड़ टाउन साउथ थाने के एक अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई रात करीब 9 बजे पलक्कड़ टाउन इलाके में की गई। पुलिस के मुताबिक, विस्फोटकों के बॉक्स तरबूज की खेप के नीचे छिपाकर रखे गए थे, ताकि शक न हो। अधिकारी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि राज्य में अवैध रूप से बड़ी मात्रा में विस्फोटक लाए जा रहे हैं। इसके बाद वाहन जांच शुरू की गई। जब पुलिस ने पिकअप वैन को रोकने का इशारा किया तो चालक नहीं रुका और गाड़ी भगा ले गया। इसके बाद पुलिस ने पीछा कर वैन को रोका और वैन की तलाशी ली। प्रारंभिक पूछताछ में चालक ने पुलिस को बताया कि उसने ये बॉक्स तमिलनाडु के कोयंबटूर से लोड किए थे और उन्हें केरल के थ्रिसूर स्थित एक खदान तक ले जा रहा था। पुलिस ने बताया कि जब्त किए गए सभी बॉक्स की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद चालक के खिलाफ एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। मामले की आगे की जांच जारी है। आज की अन्य बड़ी खबरें… रेलवे ने हाथियों की सुरक्षा के लिए AI सिस्टम लगाया, ट्रैक पर आते ही अलर्ट, लोको पायलट को रियल टाइम सूचना मिलेगी भारतीय रेलवे ने हाथियों को ट्रेन से टकराने से बचाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (IDS) शुरू किया है। यह सिस्टम रेल मंत्रालय ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ मिलकर लॉन्च किया है। रेल मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, यह सिस्टम डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर (DAS) तकनीक पर काम करता है। इसके जरिए रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की मौजूदगी का पता लगाया जाता है और लोको पायलट, स्टेशन मास्टर व कंट्रोल रूम को रियल टाइम अलर्ट भेजा जाता है, ताकि समय रहते ट्रेन की रफ्तार कम की जा सके या अन्य जरूरी कदम उठाए जा सकें। IDS सिस्टम में ऑप्टिकल फाइबर, हार्डवेयर और हाथियों की चाल से जुड़ी पहले से इंस्टॉल की गई सिग्नेचर तकनीक शामिल है। जैसे ही ट्रैक के पास हाथियों की गतिविधि होती है, सिस्टम अलर्ट जनरेट करता है। फिलहाल यह सिस्टम नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के 141 रूट किलोमीटर में उन संवेदनशील इलाकों में काम कर रहा है, जिन्हें वन विभाग ने चिन्हित किया है। इसके अलावा, भारतीय रेलवे के अन्य जोनों में भी IDS लगाने को मंजूरी दी गई है।
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