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    दावा-अफसर रिटायर होकर 20 साल बुक पब्लिश नहीं करा सकेंगे:सरकार आदेश जारी कर सकती है; पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब पर विवाद

    10 hours ago

    सरकार रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ पदों पर रहे अधिकारियों के लिए 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने पर विचार कर रही है। इस अवधि के दौरान वे अपनी सेवा से जुड़ी किताब प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। इस मुद्दे पर चर्चा पूर्व आर्मी चीफ जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश किताब को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच हुई है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में यह विषय सामने आया। कई मंत्रियों का मानना था कि मिलिट्री अधिकारियों समेत अहम पदों पर रहे अधिकारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद किताब लिखने से पहले एक निश्चित कूलिंग-ऑफ पीरियड होनी चाहिए। टाइम्स के सूत्रों के मुताबिक, यह मुद्दा कैबिनेट के आधिकारिक 27 बिंदुओं के एजेंडे में शामिल नहीं था, लेकिन सामान्य चर्चा के दौरान उठा। हालांकि इस पर जल्द ही आदेश जारी हो सकता है। क्या है नरवणे की किताब का विवाद पूर्व आर्मी चीफ नरवणे के मेमॉयर फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर विवाद 2 फरवरी को शुरू हुआ था। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मेमॉयर में बताई गई घटनाओं का जिक्र करने की कोशिश की, और सरकार ने इस पर कड़ा एतराज जताया क्योंकि किताब पब्लिश नहीं हुई थी। बाद में गांधी किताब की एक कॉपी संसद में लाए, ताकि यह साबित हो सके कि किताब मौजूद है। जल्द ही, किताब का PDF सोशल मीडिया पर शेयर होने लगा। संसद से सामने आए मुद्दे पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की। डिजिटल और दूसरे फॉर्मेट में मैन्युस्क्रिप्ट के गैर-कानूनी सर्कुलेशन की जांच शुरू कर दी। किताब की पब्लिशर पेंगुइन इंडिया ने एक बयान में कहा- किताब से जुड़ा जितना हिस्सा सर्कुलेशन में है, कॉपीराइट का उल्लंघन है। इसके बाद नरवणे ने चुप्पी तोड़ी और पब्लिशर के स्टैंड का समर्थन कि किताब पब्लिश नहीं हुई। न ही जनता के लिए उपलब्ध कराई गई है। विवाद की वजह क्या और क्यों… दरअसल, जनरल एमएम नरवणे 2019 से 2022 तक भारतीय सेना प्रमुख रहे। उनकी आत्मकथा “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” में उनके सैन्य करियर के साथ-साथ 2020 के भारत-चीन लद्दाख सीमा विवाद, गलवान घाटी की घटनाएं, अग्निपथ योजना और रणनीतिक निर्णयों का जिक्र बताया गया है। रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि 31 अगस्त 2020 को पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर कैलाश रेंज में हुए डेवलपमेंट के बारे में उनका ब्यौरा, और भारतीय सेना को चीनी उकसावे का जवाब कैसे देना चाहिए, सरकार ने इस पर तुरंत कोई पॉलिटिकल निर्देश नहीं दिया था। यही विवाद की वजह है। किताब जनवरी 2024 में पब्लिश होनी थी। न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने दिसंबर 2023 में इसका एक हिस्सा छापा। अग्निवीर स्कीम पर PTI के हिस्से ने विवाद खड़ा कर दिया और डिफेंस मिनिस्ट्री ने नरवणे और पब्लिशर को लिखा कि किताब को पब्लिश करने से पहले आर्मी को क्लियरेंस के लिए सबमिट करें। आर्मी ने किताब को डिटेल में पढ़ा, उसमें शामिल सब्जेक्ट्स पर अपने ऑब्जर्वेशन रिकॉर्ड किए। आखिरी फैसला लेने के लिए इसे डिफेंस मिनिस्ट्री को भेज दिया। डिफेंस मिनिस्ट्री ने अब तक पूर्व चीफ की किताब को अपनी क्लियरेंस नहीं दी है। उसी समय, नरवणे ने यह भी ट्वीट (अब X) किया कि उनकी किताब अब उपलब्ध है। उन्होंने अमेजन से एक प्री-ऑर्डर लिंक भी शेयर किया था। 2020 से 2024 के बीच रक्षा मंत्रालय ने 35 पुस्तकों को मंजूरी दी। नरवणे की पुस्तक फिलहाल लंबित मामलों में शामिल बताई जा रही है। अभी नियम-कानून क्या कहते हैं केंद्रीय सिविल सेवा नियम 1972 (CCS Rules) में 2021 के बाद हुए संशोधनों के तहत संवेदनशील या सुरक्षा संबंधी जानकारी के प्रकाशन पर रोक है। पूर्व अधिकारियों को संबंधित मंत्रालय-संगठन से परमिशन लेना जरूरी होता है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट) भी लागू हो सकता है।
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